घरौंदा बचपन में रेत के घरौंदे बनाती बच्चों की कोमल, रेत सनी उंगलियों को हर रोज…
Tag: काव्य
काव्य-अनसुइया वर्मा
क्या लिखूं क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल किसलिये हुआ इसका ये हाल अपने ही…
काव्य-श्रीमती मंजू लुंकड़
नारी कल्पना नहीं की जा सकती नारी बिना संसार की परिवार के आधार की देश के…
काव्य-बद्रीश सुखदेवे
प्यारा न्यारा बस्तर हमारा छत्तीसगढ़ में देवी-देवताओं का गढ़ बस और तर, तर और बस. एक…
काव्य-कमलेश्वर साहू
क्या समय रहते जाग जायेंगे बच्चे ? सदी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है यह कि बारूद…
काव्य-अरविन्द बहार
मैं बस्तर बोल रहा हूॅ अपने मन के तराजू के पलड़े तोल रहा हूँ. मैं बस्तर…
काव्य-तमंचा रायपुरी
बस्तर जंगल की पगडंडियां मुझे पसंद नहीं ऐसी पगडंडियां जो घने जंगलों से गुजरती हैं लिपटकर…
काव्य-शशांक श्रीधर
दहेज का लोभ एक दिन मैंने सोचा क्यों न बहू को मार डालूं उसका गला घोंट…
काव्य-श्रीमती गुप्तेश्वरी पांडे
गुलदान पहली मुलाकात ससुराल में पति से शादी के बाद जब हाथों में गुलदान लिए किसी…