अंक-29 पाठकों से रूबरू-साहित्य बनाम संघर्ष

साहित्य बनाम संघर्ष   इस डिजिटल युग में सबकुछ तो डिजिटल हो चुका है। इलाज, मार्केटिंग,…

नमक का दारोगा के बहाने

नमक का दारोगा जब भी हम दुनिया को लेखक की नजर से देखते हैं तो दुनिया…

मधु सक्सेना के काव्य संग्रह “पत्ते” की समीक्षा-भवेश दिलशाद

कृति/कृतिकार – पत्ते : मधु सक्सेना ‘पत्ते कभी निरर्थक नहीं हुए’ 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ जिस कठिन समय में…

चीर-फाड़-महेश्वर नारायण सिन्हा-सनत जैन की कहानी गनीमत की चीर-फाड़

चीर-फाड़-महेश्वर नारायण सिन्हा-सनत जैन की कहानी गनीमत की चीर-फाड़ सनत, आपने कहानी बहुत दिनों बाद लिखी,…

त्रिलोक महावर रचित काव्य संग्रह-शब्दों से परे की समीक्षा

त्रिलोक महावर रचित काव्य संग्रह-शब्दों से परे की समीक्षा अवमूल्यन के दौर में मनुष्यता की जिद…

काव्य संग्रह ’काव्य यात्रा’ की समीक्षा-सनत कुमार जैन

सुरेन्द्र जी की कविता में….. कविता लिखते वक्त कवि क्या सोचता है और पढ़ते वक्त पाठक…

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ’बूढ़ी काकी’ के बहाने

मुंशी प्रेमचंद की कहानी ’बूढ़ी काकी’ के बहाने मंुशी जी की कहानियों में समाज का सच…

कृष्ण शुक्ल की कहानियों की समीक्षा

प्रस्तुत कहानियों की समीक्षा कृष्ण शुक्ल जी की कहानियां पढ़ते हुए ऐसा महसूस होता है मानों…

समीक्षा – डॉ अर्चना जैन

दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों की मूल संवेदना गद्य और पद्य दोनों विधाओं में समानाधिकार से लिखने…

पदमश्री धर्मपाल सैनी की कविताओं का समीक्षा-आलेख

समीक्षा-आलेख जगतप्रिय ‘ताऊजी’ ऐसे ही ताऊजी नहीं कहलाते हैं वे अपने इस नाम के अनुरूप ही…