हलबी कविता -श्रीमती देशवती कौशिक

रूख बलसे हे माने तुमी मके नी गोंधा, रूख बलसे तुमी गोंधासित मचो, जीव करलसे तुमचोय…

हलबी कविता-सूरज नारायण कश्यप

चितरकोट मंडई जाउन रले बुलतो काजे चितरकोट मंडई हाट ने दखली मुय बायले मन चो लड़ई।…

हलबी वंदना गीत – महेश पांडे

वंदना गीत मांय दन्तेशरी चो वंदना मांय दन्तेशरी तुमके अरज करूंसे। आया रे….आशीद हमके देस।। तुमी…

हल्बी कविता-दिनेश विश्वकर्मा

धरतनी तुचो आय अकास तुचो आय । धरतनी तुचो आय । काय काजे तुय डरसित खुबे…

कविताएं -निहाल सिंह

निहाल सिंह की पांच कविताएं 1. नववर्ष  फूलों पर नई कोंपलें निकल आई है जिनपर चार-…

श्रद्धा बसंती जैन की कविताएं

रात अंधेरे को लपेटे अपने तन से रात चली उदास मन से मैंने कहा रात से,…

मेरी ग़ज़ल – डॉ बी प्रकाश मूर्ती ” पैमाना “

मेरी ग़ज़ल समन्दर से जो मिल जाता वो फिर कतरा नही रहता खुदा के साये में…

विज्ञान व्रत की ग़ज़लें

ग़ज़ल —– मुझको     लेकर    सोचेंगे पर    गूँगे    क्या    बोलेंगे काग़ज़   …

के. श्रीधर की कवितायेँ

दरख़्त खामोशी ही है मेरा गहना कि मै दरख़्त हूँ काट ही दिया जाता हूँ अक्सर…

~ डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’ के दोहे ~

~ डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’ के दोहे ~ —————————————– ‘केस’ बहुत मज़बूत था, पर भारी था…