बरगद को देखकर याद आते हैं, दादा जी अक़्सर। बूढ़े बरगद को देखकर। जिसकी लटकती आकाशीय…
Author: Bastar Paati
त्रिलोक महावर रचित काव्य संग्रह-शब्दों से परे की समीक्षा
त्रिलोक महावर रचित काव्य संग्रह-शब्दों से परे की समीक्षा अवमूल्यन के दौर में मनुष्यता की जिद…
पाठकों की चौपाल अंक-25 (जून 20-मई 21)
सम्पादक महोदय वर्तमान दौर में पत्रिका का प्रकाशन और वितरण बेहद मुश्किल हो चुका है। कोरोना…
नक्कारखाने की तूती -अंक-25 -आधार का डर क्यों ?
आधार का डर क्यों ? डर किसको लगता है कभी आपने विचार किया है ? जिसके…
कहानी-गनीमत-सनत जैन सागर
गनीमत ’अब तुमको कहीं जाने की जरूरत नहीं यहीं रहो बस!’ क्रोध से भरा आलोक चिल्ला…
लघुकथाएं-त्रिलोक महावर
लघुकथाएं-त्रिलोक महावर भूख कुछ मिलेगा बच्चा! ऊपर वाला तेरा भला करे!’ ऐसे ही याचक की झोली…