आसमान लहरा दो परचम आसमान में करो हस्ताक्षर अब आसमान में। लिख लो तकदीर अपने हाथों…
Category: पद्य
महेश राजा की लघुकथा और कविता
ईमानदार नागरिक प्रायः मुझे हर दूसरे दिन बस से शहर जाना होता था। बहुत पहले की…
कृष कर्तव्य रामटेके की कविताएं
1- कपटी जिस्म रूह बेच आया फूटी किस्मत जोड़ने को। उसे मालूम कहाँ था, सिर्फ पानी…
काव्य-किरणलता वैद्य
बरगद को देखकर याद आते हैं, दादा जी अक़्सर। बूढ़े बरगद को देखकर। जिसकी लटकती आकाशीय…
कविताएं-त्रिलोक महावर
कविताएं-त्रिलोक महावर पेंजई पीठ फेरते ही वे दाग देंगे दस -बीस गोलियाँ और एक खंजर उतार…
बढ़ते कदम- डाॅ अमितेष तिवारी
किसान का गीत…. बीज फसल में परिणित कर दूं हाथों में जब-जब मैं हल लूँ ऊसर…