क्या लिखूं क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल किसलिये हुआ इसका ये हाल अपने ही…
Category: पद्य
हाइकू-डॉ. सुरेश तिवारी
उचित युक्ति संभव कर देती सारे काम को. बात कहते प्रकृति व विवेक सदा एक ही.…
काव्य-श्रीमती मंजू लुंकड़
नारी कल्पना नहीं की जा सकती नारी बिना संसार की परिवार के आधार की देश के…
काव्य-बद्रीश सुखदेवे
प्यारा न्यारा बस्तर हमारा छत्तीसगढ़ में देवी-देवताओं का गढ़ बस और तर, तर और बस. एक…
ग़ज़ल-नूर जगदलपुरी
दफ़तर नामा…..1 अपनी मेहनत का हमें पेमेन्ट मिलना चाहिए और वो भी आज ही अर्जेन्ट मिलना…
काव्य-कमलेश्वर साहू
क्या समय रहते जाग जायेंगे बच्चे ? सदी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है यह कि बारूद…
काव्य-अरविन्द बहार
मैं बस्तर बोल रहा हूॅ अपने मन के तराजू के पलड़े तोल रहा हूँ. मैं बस्तर…
हायकू-उषा अग्रवाल ‘पारस’
करे आहत झुर्रियां, झिड़कियां ज़िन्दा चाहत. फैला देता है सन्नाटा ही सन्नाटा यादों का शोर. भैय्या…
काव्य-तमंचा रायपुरी
बस्तर जंगल की पगडंडियां मुझे पसंद नहीं ऐसी पगडंडियां जो घने जंगलों से गुजरती हैं लिपटकर…