काव्य-श्रीमती मंजू लुंकड़

नारी

कल्पना नहीं की जा सकती
नारी बिना संसार की
परिवार के आधार की
देश के विकास की.
पढ़ लिखकर विश्वास जगाती
पुरूषों के बराबर चल पाती
परिवार को सुदृढ़ बनाती
ग़र पढ़ी लिखी नारी घर आती.
सामाजिक विकास के साथ साथ
आर्थिक विकास भी कर पाती
देश की उन्नति में अपना योगदान बढ़ाती
ग़र पढ़ी लिखी नारी घर आती.
शिक्षा जगत में एक दीप जलाती
नारी शिक्षा का अभियान चलाती
हर दिल में विश्वास जगाती
ग़र पढ़ी लिखी नारी घर आती.
जीजाबाई, झांसी की रानी, इंदिरा गांधी
इतिहास रचने वाली महिलाओं की
हर पल गौरव गाथा गाती
ग़र पढ़ी लिखी नारी घर आती.
ऐसा इतिहास हमें दोहराना है
हर कन्या को पढ़ाना है
यह बात जन-जन तक पहुंचाना है
देश को मजबूत बनाना है.

श्रीमती मंजू लुंकड़
जगदलपुर
महिला उत्थान को समर्पित
‘कादम्बरी’ संस्था की सक्रिय सदस्य