काव्य-अनसुइया वर्मा

क्या लिखूं

क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल
किसलिये हुआ इसका ये हाल
अपने ही मकानों में दम घुटने लगा
खामोश जहनियत में धुआं उठने लगा है
क्यों हुआ यहांॅ का यह हाल
क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल
एक ओर वैज्ञानिक बुद्धि से देश है सराबोर
तो दूसरी ओर गरीबी का बाजार
समस्याओं का ऐसा तम्बू है तना
सरेआम यहां कारवां लुटने लगा
नारियों की अस्मिता पीटने लगी है
क्यों हुआ यहांॅ का यह हाल
क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल
यहीं का मत है, कहना मेरे देश का
‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता’
नारियों का सम्मान, मेरा देश था इसमें महान
किसलिए घटी घटना दिल्ली वाली
लुटी पिटी आश्रम की बालिका नादान
क्यों हुआ यहॉं का यह हाल
क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल
कुल की गौरव कही थी नारी
कहीं आंॅख का तारा
उससे संचालित सब संसार तुम्हारा
फिर क्यों तुमने ही उसे उजाड़ा
क्यों कर दिया मासूम बच्चियों का ये हाल
क्यों हुआ यहांॅ का यह हाल
क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल
नारी ही बनी प्रेरणा
तब हुये तुलसी कालीदास
उसका ही प्रभाव था उन पर
जो बना शीर्ष इतिहास
जागो मेरे देश के भाईयों न करो उन्हें तार तार
क्यों हुआ यहॉं का यह हाल
क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल
कभी बहिन मॉं के स्वरूप में
तुमको दुलार दिया
अंकशायनी बनी तुम्हारी
अपना जीवन वार दिया
लेकिन तुमने अपने गर्व से
पहले से ज्यादा अपमान किया
उसकी उदारता पर तुमने उसको चोट दिया
कुसंस्कारों की दानवता छोड़ो
जागो उसको पहचानो
उसकी अस्मिता की रक्षा करो
न करो उसे बेजार
क्यों हुआ यहॉं का यह हाल
क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल
कितनों की लुटी अस्मतें कितने बिके बदन
कितने जलाये, गाड़े गये कितने बेकफ़न
कैसे बचायें विरान-ए-चमन
नारी का धैर्य साहस ले इंसानियत जगा लो
न करो उसे बेनाम
मेरा देश है क्यों बदनाम
क्यों हुआ यहॉं का यह हाल
क्या लिखूं क्यों है मेरा देश बेहाल

श्रीमती अनुसुइया वर्मा
म. नं.-34 शिव मंदिर के पास
किरन्दुल जिला-दंतेवाडा-494556
मो.-09424264525