जनता सब समझती है बेवकूफ न समझना

जनता सब समझती है बेवकूफ न समझना सुबह सुबह आने वाली काम वाली बाई आज काफी…

लघुकथा-महेश राजा

मेकअप किसी ने हवलदार जी से पूछा,-“क्यों साब, आपने यह खबर पढी कि नहीं, कि भ्रष्ट…

कहानी-आत्मविश्वास-अंकुश्री

आत्मविश्वास सुबह-सुबह मैं दरवाजे पर बैठा ब्रश कर रहा था। तभी एक लड़की मेरे सामने आकर…

अंक-17-बहस-मार्क्स एवं गांधी बनाम मार्क्सवाद एवं गांधीवाद, 1-परिचय

मार्क्स एवं गांधी बनाम मार्क्सवाद एवं गांधीवाद 1-परिचय हल्की हवा का झोंका आया और पीपल के…

लघुकथा-समाजसेवी-सीताराम गुप्ता

समाजसेवी अनिल कुमार जी से मेरी मुलाकात बहुत पहले हुई थी एक मित्र के यहां। समाज…

कहानी-नई रैक-राम नगीना मौर्य

नई रैक पढने-लिखने-गढ़ने का शौक भी अजीब शगल है। घर के सदस्य तो अब नीलाम्बर प्रसाद…

अंक-17-बहस-8-विस्थापन

8-विस्थापन ’’प्राकृतिक संतुलन चाहे तकनीक से बिगड़े अथवा युद्ध के कारण, प्राणियों का विस्थापन निश्चिंत है।…

लघुकथा-आवाजें-डॉ. शैलचंद्रा

आवाजें आज उसके घर से आने वाली सारी आवाजें बंद थी। जब भी वह अपने काम…

अंक-17-बहस-7-मानव बनाम प्रकृति

7-मानव बनाम प्रकृति इस बौद्धिक सन्नाटे में मुझे प्रकृति और मानव के रिश्ते दिखाई दे रहे…

लघुकथा-अमृता जोशी

ईमानदारी का ईनाम बुधवा ने बहुत ज्यादा गरीबी से अपने बेटे अमर को पढ़ाया-लिखाया और अपने…