लघुकथा-महेश राजा

मेकअप

किसी ने हवलदार जी से पूछा,-“क्यों साब, आपने यह खबर पढी कि नहीं, कि भ्रष्ट अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया जायेगा ? अब आप क्या करोगे ?
चुटकी भर तंबाकू दाँत के नीचे दबाते हुए हवलदार जी इत्मीनान से बोले,-“सरकार का हुक्म सर आँखों पर। लेकिन बात यह है कि कोई तारीख भी तय कर दी जाती कि भई इस तारीख से कर रहे है
तो थोडी सुविधा रहती। पिछला अगला सब मेकअप कर लेते।“

शांतिपूर्ण

-“आप लोगो की तरफ कैसे रहे चुनाव ?“
एक मित्र मोबाइल पर दूर देश के अपने साथी से पूछ रहे थे।
-“लगभग शांति रही, बस….चार पांच लोग ही मरे। छिटपुट दंगे भी हुए। दो तीन बसे जलायी गयी। पर अब सब कुछ कन्ट्रोल में है।“
साथी का जवाब था।

याददाश्त

भाई साहब कह रहे थे, क्या बात है, आजकल कुछ याद नहीं रहता..बात करते-करते भूल जाता हूं…..किसी को बहुत दिनों बाद देखता हूं या मिलता हूं तो पहचानने में मुश्किल होती है।
मैंने उन्हें समझाया कि ऐसा थकान या बेवजह तनाव के कारण होता है। साथ ही वह बात जो दिल पर घाव या चुभन नहीं छोड जाती, हमारी याददाश्त से बाहर हो जाती है।
भाई साहब उम्र में मुझसे काफी बड़े है। 76 वर्ष पार कर चुके है लेकिन मुझसे मित्रवत व्यवहार करते है। मैंने कहा-“सुबह शाम दूध के साथ बादाम लीजिए….याददाश्त के लिये फायदेमंद होगा।
भाई साहब दार्शनिक अंदाज में हंसे, फिर बोले,-“दूध बादाम से कुछ नहीं होने वाला। मैं तो यह सोच रहा था कि इंसान की पूरी याददाश्त ही खो जाये तो कितना अच्छा हो….जिन्दगी की सारी कटुता इस याददाश्त की वजह से ही तो है।“

 

महेश राजा
वसंत-51, कालेज रोड
महासमुंद, छत्तीसगढ़
मो.-9425201544