भूख मैं अच्छी तरह जानता हूँ, हजूर भूख नहीं महसूस कर सकते आप आप नहीं जान…
Day: March 1, 2016
काव्य-राजेश जैन राही
राही के दोहे 1-शोर करे मिटती नहीं, ओछेपन की धूल। सच्चे कर्मों से खिले, कीचड़ में…
अंक-8-बहस-कहानी के तत्व: नाटकीयता और बुनावट
कहानी के तत्व: नाटकीयता और बुनावट आज हम कहानी के दो प्रमुख तत्वों पर बात करना…
पदमश्री धर्मपाल सैनी की कवितायेँ
पदमश्री धर्मपाल सैनी की कवितायेँ पृच्छा -1- काम पृच्छा आयु में अमर है, अस्तित्व हित…
आत्मकथन: पद्मश्री धर्मपाल सेनी
आत्मकथन: पद्मश्री धर्मपाल सेनी बस्तर- स्वप्न, प्रयत्न और परिवर्तन अपनी चमकदार और गहरी और भावभरी आंखों…
कहानी-बंजारन-रत्न कुमार सांभरिया
बंजारन सांप की लकीर- सी सर्पाकार सड़क खेतों-खांखरों से होती गांवो-ढाणियों की ओर निकल गई थी।…
आलेख-नारी के आसपास-नवल जायसवाल
नारी के आसपास नारी सृष्टि का प्रतीक है जो पृथ्वी के उद्विकास की विभिन्न अवस्थाओं एवं…
व्यंग्किाएं
व्यंग्किाएं नसीहत मैंने, एक भ्रष्टाचारी की लानत मलानत की…! और ऊपर से अच्छी नसीहत दी…! उसने…