समीक्षा-पासंग दर्द की चितेरी पद्मश्री मेहरून्निसा परवेज़ जी का अद्भुत उपन्यास है ‘पासंग’ ‘‘पासंग यानि की…
Day: June 1, 2015
अंक-5+6+7 पाठकों की चौपाल
पाठकों की चौपाल प्रिय पाठक, नमस्कार, कुछ बातें ‘बस्तर पाति’ के नियमित कॉलम के संबंध में…
अंक-5-कविता कैसे बदले रूप
कविता का रूप कैसे बदलता है देखें जरा। नये रचनाकार ने लिखा था, नवीन प्रयास था…
कहानी-जंगल कथा-लोकबाबू
जंगल गाथा प्राकृतिक सम्पदा से सम्पन्न छत्तीसगढ़ की अमीर धरती पर गरीबी घासफूस की तरह फैली…
मेहरून्निसा परवेज़ का सम्पादकीय साहित्य
मेहरून्निसा परवेज़ का सम्पादकीय साहित्य हिन्दी, अंगरेजी, फ्रेंच, चीनी आदि के साहित्येतिहास में,-संस्मरण, रेखाचित्र, पत्र-साहित्य, डायरी-साहित्य,…
हल्बी लोक संगीत की दशा और दिशा-बलबीर सिंह कच्छ
हल्बी लोक संगीत की दशा और दिशा जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा है संगीत! पर्व, तीज-त्यौहार…
विशेष रपट -बस्तर पाति प्रकाशन की पुस्तकों का भव्य विमोचन
बस्तर पाति प्रकाशन की पुस्तकों का भव्य विमोचन श्री विमल तिवारी जी का काव्य संग्रह ‘गीत-गुंजन’,…
विश्वधरोहर-उसने कहा था- चंद्रधर शर्मा गुलेरी
उसने कहा था बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई…
काव्य-श्रीमती शैल दुबे
शक्ति स्वरूपा बेटियां शक्ति स्वरूपा वजूद तुम्हारा नई सदी ने अब स्वीकारा। दो ही फूल से…