हलबी कविता -विश्वनाथ देवांगन

रान बन के नी गोंदा फल दयसे पान दयसे, दयसे आमके पानी। रान बन के नी…

हलबी कविता -नरेंद्र पाढ़ी

भुतयार मंय भुतयार आंय मसागत करून खंयसे, कुटुम संगे हरिक ने रहेंसे। मंय मसागत करेंसे मसागत…

हलबी कविता-हितेन्द्र कोण्डागंया

– पडा-लिका – पडा लिका अरू लिका पडा लगे जानू ईसकूल आसे । अदायं तो मुबाईल…

हलबी कविता-पुरषोत्तम पोयाम

बलले बडे अकल राने गोटोक बाघ… रये, सब जीव के डराऊन खाए। गोटक दिने प्यास काजे,…

हलबी कविता -डी राज सेठिया

अकतई सुंदर दिन आज इली, सियान सजन के मन भावली। इली इली अकतइ तिहार इली।1। बड़े…

हलबी कविता-सनत सोरी

मया करेंसे मैं तुचो दीवाना आँय मया करेंसे। सुरता करुन तुके मैं बया होलेंसे। स्नु पाउडर…

हलबी कविता -गिरिजा प्रसाद पांडे

भितरे बांदा गोटोक अचरीत दखलुं रे दादा जीव जनावर हरिक होला मनुख होला भितरे बांदा।। धन…

हलबी कविता-केशर चंद्र पुजारी

बस्तरिया साग भाजी ऐ ना ऐ बाबू बुदरू। कसने होओ सुदरूं।। मंद लांदा के छांडून। भात…

हलबी कविता-गणेश मानिकपुरी

बेटी बेटी जेबे जनम धरली, पारा गुड़ा उदिम होली… थुमुक-थामक हिंडुक सिकली, हिंडा बुला के हुनचो…

हल्बी कविता-अशोक नेताम

हल्बी कविता पीला बेरा चो समया बुलतूँ संगवारी मन संग खमना ने. चिपटी ने नोन मिरी…