रान बन के नी गोंदा फल दयसे पान दयसे, दयसे आमके पानी। रान बन के नी…
Category: पद्य
हलबी कविता -नरेंद्र पाढ़ी
भुतयार मंय भुतयार आंय मसागत करून खंयसे, कुटुम संगे हरिक ने रहेंसे। मंय मसागत करेंसे मसागत…
हलबी कविता-हितेन्द्र कोण्डागंया
– पडा-लिका – पडा लिका अरू लिका पडा लगे जानू ईसकूल आसे । अदायं तो मुबाईल…
हलबी कविता-पुरषोत्तम पोयाम
बलले बडे अकल राने गोटोक बाघ… रये, सब जीव के डराऊन खाए। गोटक दिने प्यास काजे,…
हलबी कविता -डी राज सेठिया
अकतई सुंदर दिन आज इली, सियान सजन के मन भावली। इली इली अकतइ तिहार इली।1। बड़े…
हलबी कविता-सनत सोरी
मया करेंसे मैं तुचो दीवाना आँय मया करेंसे। सुरता करुन तुके मैं बया होलेंसे। स्नु पाउडर…
हलबी कविता -गिरिजा प्रसाद पांडे
भितरे बांदा गोटोक अचरीत दखलुं रे दादा जीव जनावर हरिक होला मनुख होला भितरे बांदा।। धन…
हलबी कविता-केशर चंद्र पुजारी
बस्तरिया साग भाजी ऐ ना ऐ बाबू बुदरू। कसने होओ सुदरूं।। मंद लांदा के छांडून। भात…
हलबी कविता-गणेश मानिकपुरी
बेटी बेटी जेबे जनम धरली, पारा गुड़ा उदिम होली… थुमुक-थामक हिंडुक सिकली, हिंडा बुला के हुनचो…
हल्बी कविता-अशोक नेताम
हल्बी कविता पीला बेरा चो समया बुलतूँ संगवारी मन संग खमना ने. चिपटी ने नोन मिरी…