श्रद्धा बसंती जैन की कविताएं

75+ रात शायरी | Raat Shayari in Hindi| रात की शायरी इन हिंदी | Night Quotes in Hindi

रात
अंधेरे को लपेटे अपने तन से
रात चली उदास मन से
मैंने कहा रात से, तुम क्यों हो निराश
तुम नहीं जानती, क्या क्या है तुम्हारे पास!

तुम्हारे आंचल में चांद तारे हैं
तुम्हारी आंखों में सपने सुहाने हैं
तुमने ही दी सभी को सूरज की नयी किरण,
नये सपने ले के आए ओस के ये कण!

सबने किया आराम तुम्हारी ही गोद में
कुछ कह नहीं सकती तुम्हारे विरोध में
फिर न कहना कभी कि तुम हो बड़ी उदास,
क्योंकि तुम नहीं जानती कि तुम हो कितनी खास!

दिल तो बच्चा है जी – बचपन की यादें - Manu Kahin

बचपन

मैंने बचपन को बचपन में खोते देखा है
बचपन को जवान होते देखा है
अब नहीं रही उनमें कोई शरारतें
क्योंकि हंसी को उदास होते देखा है।

मैंने कहा बचपन को चल हम वहां चलते हैं
जहां घंटों बैठे पानी में पत्थर मारते थे
या नहीं तो चल हम कन्चे खेलें,
जिसे तुम हमेशा जीता करते थे!

बचपन ने कहा प्यार से बचपन को अलविदा
जिम्मेदारी का बोझ उठाते हुए चला
बचपन ने कहा बचपन को, तू जा मेरे भाई
क्योंकि मैंने गुलजार को वीरान होते देखा है।

श्रद्धा बसंती जैन 

रायपुर