व्यंग्य-सुभाष पांडे

भूख मीमांसा चलते-चलते वे मुझे बाजार में मिल गए। मुझे रोक कर बोले -’अरे भाई! तुमने…

व्यंग्य-सुरेन्द्र रावल

हम फिर चूक गये पहले भी ऐसा ही होता था। इस बार भी यही हुआ। पहले…

व्यंग्य-सुभाष पाण्डे

सावधान मंत्री भ्रमण पर आ रहे हैं एक वन अधिकारी, जिसने हाल ही में उच्च स्तरीय…

लेखन का नया चलन- व्यंग्य : डॉ किशोर अग्रवाल

लेखन का नया चलन क:”आजकल खूब छप रहे हो आज भी भारत न्यूज़ के साहित्यिक बनने…

व्यंग्य-भारतीय संस्कारों से घृणा क्यों ?

भारतीय संस्कारों से घृणा क्यों ? ’’एक जन्म तो झेलना मुश्किल है सात जन्मों का कौन…

व्यंग्य-सुरेन्द्र रावल-अंग्रेजों की जूठन

अंग्रेजों की जूठन सुना है, अंग्रेजों का भारत से जाने का कोई इरादा न था। कभी…

व्यंग्य-सुरेन्द्र रावल-मेरी सड़क

मेरी सड़क मुझे लगातार लग रहा है कि मेरी सड़क के प्रति पुरातत्ववेत्ताओं की उपेक्षा कोई…