आलेख-पाठकों की समस्याः लेखक क्या करे-बुड़बक सिंह राजपूत

पाठकों की समस्याः लेखक क्या करे   लेखक और पाठकों का विमर्श ब्रहम् के विमर्श की…

महेश राजा की लघुकथा और कविता

ईमानदार नागरिक प्रायः मुझे हर दूसरे दिन बस से शहर जाना होता था। बहुत पहले की…

कृष कर्तव्य रामटेके की कविताएं

1- कपटी जिस्म रूह बेच आया फूटी किस्मत जोड़ने को। उसे मालूम कहाँ था, सिर्फ पानी…

डॉ. किशोर अग्रवाल की कविताएं

बहुत दिन बाद गर्द धुंध व कोहरे की उदासी से निकल कर धूप नीचे तक उतर…

चीर-फाड़-महेश्वर नारायण सिन्हा-सनत जैन की कहानी गनीमत की चीर-फाड़

चीर-फाड़-महेश्वर नारायण सिन्हा-सनत जैन की कहानी गनीमत की चीर-फाड़ सनत, आपने कहानी बहुत दिनों बाद लिखी,…

साहित्यिक उठापटक-अंक-25

नववर्ष मिलन समारोह और कवि सम्मेलन शनिवार की शाम, साहित्य एवं कला समाज जगदलपुर द्वारा नववर्ष…

काव्य-किरणलता वैद्य

बरगद को देखकर याद आते हैं, दादा जी अक़्सर। बूढ़े बरगद को देखकर। जिसकी लटकती आकाशीय…

त्रिलोक महावर रचित काव्य संग्रह-शब्दों से परे की समीक्षा

त्रिलोक महावर रचित काव्य संग्रह-शब्दों से परे की समीक्षा अवमूल्यन के दौर में मनुष्यता की जिद…

पाठकों की चौपाल अंक-25 (जून 20-मई 21)

सम्पादक महोदय वर्तमान दौर में पत्रिका का प्रकाशन और वितरण बेहद मुश्किल हो चुका है। कोरोना…

नक्कारखाने की तूती -अंक-25 -आधार का डर क्यों ?

आधार का डर क्यों ? डर किसको लगता है कभी आपने विचार किया है ? जिसके…