बहुत दिन बाद गर्द धुंध व कोहरे की उदासी से निकल कर धूप नीचे तक उतर…
Category: पद्य
काव्य-किरणलता वैद्य
बरगद को देखकर याद आते हैं, दादा जी अक़्सर। बूढ़े बरगद को देखकर। जिसकी लटकती आकाशीय…
कविताएं-त्रिलोक महावर
कविताएं-त्रिलोक महावर पेंजई पीठ फेरते ही वे दाग देंगे दस -बीस गोलियाँ और एक खंजर उतार…
बढ़ते कदम- डाॅ अमितेष तिवारी
किसान का गीत…. बीज फसल में परिणित कर दूं हाथों में जब-जब मैं हल लूँ ऊसर…
मुकेश मनमौजी की कविताएं
रात अंधेरी सन्नाटा पसरा हुआ आकाश में चाँद बादल की ओट में अनायस चटकती सी आवाज…