बस्तर जंगल की पगडंडियां मुझे पसंद नहीं ऐसी पगडंडियां जो घने जंगलों से गुजरती हैं लिपटकर…
Category: पद्य
हायकू-उषा अग्रवाल ‘पारस’
करे आहत झुर्रियां, झिड़कियां ज़िन्दा चाहत. फैला देता है सन्नाटा ही सन्नाटा यादों का शोर. भैय्या…
काव्य-शशांक श्रीधर
दहेज का लोभ एक दिन मैंने सोचा क्यों न बहू को मार डालूं उसका गला घोंट…
नयी कलम-रेखराम साहू
चला जाऊंगा मैं कभी चला जाऊंगा मैं कभी शहर तेरा ये छोड़कर नहीं आऊंगा फिर यहां…
नयी कलम -आशीष सिन्हा
ख़ामोश़ बस्तर मैं खा़मोश़ बस्तर हूं मेरे दुख को कोई क्या जाने ख़ामोश़ी मेरी बयां कर…
काव्य-श्रीमती गुप्तेश्वरी पांडे
गुलदान पहली मुलाकात ससुराल में पति से शादी के बाद जब हाथों में गुलदान लिए किसी…
काव्य-कल्पना नाग
माँ जिन्हें मिला मां का स्नेह वे बड़े खुशनसीब जिन्हें मिला मां का आंचल वे बड़े…
काव्य-संतोष श्रीवास्तव
संभावनायें असीम बस्तर संभाग में बहुत सी संभावनायें हैं पर्यटनों की संभावना, यहां पर असीम हैं.…
काव्य-खदीजा खान
चलना है तब तक चलना है तब तक पैरों की थकन टूटकर चूर न कर दे…