काव्य-महेंद्र कुमार जैन

अर्थ

अर्थ में ही अर्थ है
समर्थ का ही अर्थ
अन्यथा
जीवन उसका व्यर्थ है.

स्वार्थ में निःस्वार्थ में,
कृतार्थ में परमार्थ में
अर्थ ही अर्थ है
अन्यथा
सब व्यर्थ है.

तंत्र में अर्थ का, मंत्र में अर्थ का
पदार्थ में भी अर्थ
महत्व ही महत्व है.
अन्यथा
सब व्यर्थ है.

मान में, सम्मान में
न्याय में, अन्याय में
शिष्टाचार में भ्रष्टाचार में
अर्थ का महत्व है.
अन्यथा
सब कुछ व्यर्थ है.

अर्थ के कई अर्थ हैं
अर्थ क्या, कहां, कैसे, कब और क्यूं
परिभाषित है
अन्यथा
सब कुछ व्यर्थ है.

अर्थ जीवन का
जीवन के लिए, जीवन के द्वारा
एकत्रित है.
इसमें जीवन का सार है
अन्यथा
सब बेकार है.

देश में, विदेश में
मुखौटों में, वेश में
परिधान में, परिवेश में
अर्थ का ही अर्थ है
अन्यथा
सब कुछ व्यर्थ है.

समय

समय मूल्यवान है
जिसमें सार और अर्थ समाहित है
इस जानो, पहचानो
फिर
इसके साथ चलना सीखो

समय बलवान है
जिसमें शक्ति और ताकत भरी है,
इसे चुनौती मत दो
इसके सामने जग हारा है
इसलिए इसके अधीन रहकर,
काम करना सीखो.
समय चक्र है,
भूत, वर्तमान और भविष्य में विभक्त है.
भूतकाल से प्रेरणा लेकर
वर्तमान में चलना सीखो
भविष्य में गलती न हो
इसकी चेष्टा करो.

समय परीक्षा की घड़ी है
जो दुख और सुख दो खंडो में बॅेटी है.
दुख में धैर्य न खोइये,
सुख में ज्यादा प्रफुल्लित मत होइये
सभी दिन समान हैं
यही समझा कीजिये.

महेन्द्र कुमार जैन
प्राचार्य हाई स्कूल
सरगीपाल पारा, कोंडागांव, छ.ग.
मो.-09424291637