लघुकथा-डॉ शैल चंद्रा

परिवर्तन गांव से आई हुई अम्मा को जब शहरी बहू ने सुबह-सुबह चाय का प्याला पकड़ाया…

फेसबुक वाल से-शैलेन्द्र सिंह

23 जुलाई 2016 हर पत्ते, दरख़्त, जर्रे-जर्रे में तुझे पाता हूँ, अहसास की ये कैसी खुशफहमी…

लघुकथा-रचना

किसके लिए रोता है?….. रात साढ़े नौ बजे थे। पोलीस थाने में पी. एस. आय. “हवलदार..…

लघुकथा-वर्षा रावल

दो आँखें… ’’माँ, मैं अगले माह आ जाऊँ क्या ? डिलिवरी यहां सम्भव नहीं लग रही,…

अंक 9+10-कविता कैसे बदले तेरा रूप

कविता का रूप कैसे बदलता है देखें जरा। नये रचनाकार ने लिखा था, नवीन प्रयास था…

लघुकथा-सुषमा झा

काम ‘मां! आप काम करते-करते थक जाती हो।’ ‘क्या करूं बेटा! काम करना तो पड़ेगा ही।…

लघुकथा-पवन तनय अग्रहरि अद्वितीय

दिया तले अंधेरा प्रतिदिन सुबह और सांयकाल मंदिर में पूजन करने के बाद पुजारी जी थाली…

लघुकथा-उर्मिला आचार्य

इष्ट पूजा बेटा बड़े मनुहार के बाद आया इष्टपूजा के लिए। ‘’होता’’ परिवार के ठीक सामने…

लघुकथा-भरत गंगादित्य

उच्च शिक्षित ‘‘पिताजी! लीजिए दूध।’’ उसने चौक कर देखा, उसका लड़का दूध लेकर सामने खड़ा था।…

कृष्ण शुक्ल की कहानियों की समीक्षा

प्रस्तुत कहानियों की समीक्षा कृष्ण शुक्ल जी की कहानियां पढ़ते हुए ऐसा महसूस होता है मानों…