हिसाब पिता यदा-कदा कहते रहते थे-‘‘तुम्हारी पढ़ाई-लिखाई पर मेरे लाखों रूपये खर्च हो गये।’’ बेटा पढ़-लिखकर…
Category: गद्य
गद्य आधारित विधाओं का स्तम्भ
लघुकथा-कमलेश चौरसिया
दादाजी की आत्मा ‘‘चल अपुन जादू-जादू खेलेंगे!’’ ‘‘कहां भैया ?’’ ’’अरे, ऊपर गच्ची में। वो पानी…
लघुकथा-कृष्णचंद्र महादेविया
पुण्य लाभ प्रेमू राम ठाकर की अमीरी का रौब कार में आए तीनों समाज सेवियों पर…
लघुकथा-माधुरी राउलकर
अपनी मंजिल शलाका अपनी गृहस्थी में खुश थी। नई-नई शादी हुई थी। पति भी अच्छा मिला…