मैं तो बिलकुल खुली किताब रहा, उन को पढ़ने से इज्तिनाब रहा।। ज़िन्दगी भर उन्हें हिजाब…
Category: ग़ज़ल
ग़ज़ल-विक्रम सोनी
1. समंदर में तूफां ये मौजें ये धारें। कहां चल दिये बेखुदी के ये मारे। उसूलों…
ग़ज़ल-रउफ परवेज़-अंक-1
-1- अपने ही घर में अपने ही साये से डर लगा सेहरा में जा के बैठे…
ग़ज़ल-शमीम बहार
ग़ज़ल-1 वक्त अंधेरे में देखने वाला नहीं होता, शहर वतन में क्या-क्या नहीं होता. सुबहो-शाम ये…
ग़ज़ल-नूर जगदलपुरी
दफ़तर नामा…..1 अपनी मेहनत का हमें पेमेन्ट मिलना चाहिए और वो भी आज ही अर्जेन्ट मिलना…