~ डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’ के दोहे ~ —————————————– ‘केस’ बहुत मज़बूत था, पर भारी था…
Author: Bastar Paati
सनत जैन की कहानी – बैरागी
बैरागी ’सोचता हूं मैं रेवती की बात मानकर उसके साथ रहने लगूं।’ अचानक दूसरी बातों के…
अनिल जैन की दो ग़ज़लें
ग़ज़ल 1 तिश्नगी (प्यास) सांस जाये टूट पर ज़िंदा रहेगी तिश्नगी बेकरारी का बने कोई सबब…
पं.जमदग्निपुरी की चार कवितायेँ
बचपन का सपना ———————— बचपन में सोंचा करते थे, पता नहीं कब सयान होगें। पता नहीं…
डॉ शैल चंद्रा की आठ लघुकथाएं
शॉपिंग “देख तो रमशीला, ये साड़ी कैसी है। अभी-अभी आन लाइन शॉपिंग से आई है।”मालकिन ने…
विद्या गुप्ता की कवितायेँ
कविता-1 शुक्रिया….!! पावस तुम आए घर गगन तक पावन सोंधी माटीगंध भर लाये पतझड़ हुए मन…
माणक तुलसीराम गौर की कहानी – भाभी
भाभी ‘हम दो हमारे दो’ के सुन्दर नारे को चरितार्थ करते हुए शर्मा परिवार सुखी जीवन…
रजनी साहू “सुधा” की तीन कवितायेँ
मैंनें बस्तर को बोलते सुना है । बस्तर कह रहा है कि, मैं भारत के मानचित्र…