उंगलबाज ’’यार! साहित्य में खुद को बड़ा साहित्यकार कैसे साबित करूं ? मैं न तो ढंग…
Author: Bastar Paati
सुरेन्द्र रावल की कविता
वह वृक्ष वह वृक्ष, जिसमें बनाए थे पंछियों ने घोंसले, वह वृक्ष, अब बदल गया है।…
काव्य – शिवेन्द्र यादव
तमन्ना ख़्वाबों के एक जहाँ में यादों के आसमां में अपने अरमानांे पर कर काबू तुम्हारी…
काव्य – रजनी साहू ‘सुधा’
कीमती समान निश्चय ही मैं याद रखूंगी यात्रा में मेरे कीमती सामान, सब अपने पास रखूंगी।…
लेखकों से निवेदन
लेखकों से निवेदन वैसे तो साहित्य की तमाम विधाएं महत्वपूर्ण हैं किसी भी विधा को कमतर…
काव्य संग्रह ’काव्य यात्रा’ की समीक्षा-सनत कुमार जैन
सुरेन्द्र जी की कविता में….. कविता लिखते वक्त कवि क्या सोचता है और पढ़ते वक्त पाठक…
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ’बूढ़ी काकी’ के बहाने
मुंशी प्रेमचंद की कहानी ’बूढ़ी काकी’ के बहाने मंुशी जी की कहानियों में समाज का सच…
अंक-20-पाठकों की चौपाल
आदरणीय संपादक महोदय नमस्कार आपकी पत्रिका मिली पढ़कर संतुष्टि हुई कि लीक पर ही नहीं चला…