हलबी कविता -श्रीमती देशवती कौशिक

रूख बलसे हे माने तुमी मके नी गोंधा, रूख बलसे तुमी गोंधासित मचो, जीव करलसे तुमचोय…

हलबी कविता-सूरज नारायण कश्यप

चितरकोट मंडई जाउन रले बुलतो काजे चितरकोट मंडई हाट ने दखली मुय बायले मन चो लड़ई।…