रान बन के नी गोंदा
फल दयसे पान दयसे,
दयसे आमके पानी।
रान बन के नी गोंदा,
आमके होयसे हानि ।।
खमना खूबे रले दादा,
राज ने खूबे पानी गिरेदे।
चार महू बेहड़ा शिवना,
आमके जमाय खाऊक मिरेदे।
आमा दयसे अमली दयसे,
दयसे आमके बन चो रानी।
बन ने नाचत लम्हा कोडरी,
हरिक मन ने बोहूक भाती आंगा।
आमचो रान बन आमचो जीवना,
असन हरिक उदिम करून दादा।
चड़ई चिंड़गुड़ कितरो सुंदर,
सुंदर कोयली रानी।
बिहा बर होले दादा,
जमाय जीमीक आमचो बन।
बन आमचो जीवना आरू,
बन आमचो धन।
कांदा कूली दयसे दीदी,
दयसे लेहरा पानी ।
सिरसीकरीन ’सायबो’ दीदी,
बास्तानारीन ’मनकी’ बाई।
महु काजे नी जरावा,
गुलाय बन के रांई छाईं।
चार नयसे महू नयसे,
नयसे बीकूक ’मंगली’ नोनी।
बन बस्तर रिसाली गुने,
डेरा पड़ला ’लाल’ कोलेया।
बस्तर माटी चो रस ने,
बनाला आमके डोम ओड़ेया।
बन के अइग नीधराले,
बन के दाड़दूड़ नी गोंदले,
हरिक होयदे बन चो रानी ।

विश्वनाथ देवांगन
कोंडागांव(बस्तर)छत्तीसगढ़