हलबी कविता-सनत सोरी

मया करेंसे
मैं तुचो दीवाना आँय मया करेंसे।
सुरता करुन तुके मैं बया होलेंसे।
स्नु पाउडर लगातो,
मुचुक- मुचुक हासतो तुचो, खूबे बायेसे।
नाक चो नथनी,
कान चो बाली तुचो, खूबे पोबेसे।
पानी गेलोने, बेड़ा गेलोने,
उलटुन पलटुन दखेंसे,
कहँय गेलोने ऐतोके तुचो, बाट दखेंसे।
मैं तुचो दीवाना आँय, मया करेंसे।
आया के बले सांगेंदे,
बाबा के बले सांगेंदे,
मन करले तुय मके माहला पटायेंदे।
चितरकोट घूमर अउ तीरथगढ़ दखायेंदे,
लाल पलसर ने मैं तुके बुलायेंदे।
सुरता ईलो मैं तुचो फोटो के दखेंदे।
मन नी मान लेक मोबाईल में फोन लगायेंदे।
तुचो मचो जोड़ी खूबे सबके पोबेसे,
मै तुचो दीवाना आँय मया करेंसे।
सुरता अयसे शाँझ- बिहाने,
मचो दिल में डेरा बनालिस,
खाऊक नी होय सोऊक,
तुय मके बया बनालीस।
सजुन-धजुन बेनी हलाउन तुय निकरसीत,
संसार चो रूप रानी असन दखसीत।
जन्म -जन्म ले पावतो काजे तुके सपना दखेंसे।
मैं तुचो दीवाना आँय मया करेंसे।
.
सनत सोरी
कोयतुर