हलबी कविता -डी राज सेठिया

अकतई

सुंदर दिन आज इली,
सियान सजन के मन भावली।
इली इली अकतइ तिहार इली।1।

बड़े बिहान मिलून भाटी, गेलू नन्दी बाट।
पितर लोग के गुहराउन भाती, टिकलु चाउर संगे तीली।
इली इली अकतई तिहार इली।2।

काय मंजा आमा खापुन बनालू हुन के कूचा।
फरसा पान के जोंगुन भाटी, बनालू हामी डोबली।
इली इली अकतई तिहार इली।3।

जाम डारा के गुड़ा बनाउन, करलू हामी गुहार।
चार, आमा संग आसे गुड़ चो भेली।
इली इली अकतई तिहार इली।4।

रोसई चाउर जोड़ून भाती दिलु सगा मन के।
पना, रोटी खाऊन भाती सबके मन के भावली।
इली इली अकतई तिहार इली।5।

सियान धियान के सुमरलू, करलू सबके जुहार।
किसान दादा बल धान निकरालो दुइ गपली।
इली इली ,अकतई तिहरा इली।।6।।

डी.राज सेठिया
बनियागांव, कोंडागांव