व्यंग्य-भारतीय संस्कारों से घृणा क्यों ?

भारतीय संस्कारों से घृणा क्यों ? ’’एक जन्म तो झेलना मुश्किल है सात जन्मों का कौन…

काव्य-त्रिलोक महावर

पहचान बिना सोचे समझे कहीं भी सिर झुक जाए बगैर सहमति गिनती के काम आए यह…

प्रीति प्रवीण खरे की कविताएं

द्रोपदी हाथ पकड़ कर दुशासन मौन सभा में लाया पांडव कुछ भी न बोले माँं का…

बढ़ते कदम- अनिता चांडक की कविताएं

आसमान धरती पर गड़ा वृक्ष, आसमान की ओर बढ़कर फलेगा। आसमान की वर्षा से, धरती का…

बढ़ते कदम-ओम प्रकाश ध्रुव की कविताएं

  अनजान निकल पड़ा हूँ अनजान डगर पे, शायद मंज़िल मिले इसी सफ़र पे। उम्मीद की…

अंक-25 बहस -कहानी में वाचिकता

कहानी में वाचिकता इस धरती में कहानी कब शुरू हुयी होगी। उसका स्वरूप कैसा होगा। जाने…