व्यंगिकाएं-अविनाश ब्योहार

व्यंगिकाएं

आधे-अधूरे
नेता जी ने
खूब कालाधन कमाया!
और धीरे से
उसे स्विस बैंक
में पहुंचाया!!
लेकिन नेता जी
के सभी वायदे
निकले झूठे!
जनता के भाग्य
जनता से रूठे!!
तो ऐसे राजनीतिज्ञ
जनता के बगैर
आधे-अधूरे हैं!
वे तपाक से बोले-
यानी नेता जी
आंख के अंधे
गांठ के पूरे हैं!!

किस्मत
वे अपने क्षेत्र
में छा गये!
चापलूसी की
बदौलत मंत्री
पद पा गये!!
यानी उनकी
किस्मत जग गई!
किसी ने
कटाक्ष किया-
अंधे के हाथ
बटेर लग गई!!

चमचागिरी
वे पहाड़
क्या ठेलेंगे
उनमें राई
बराबर भी
नहीं है बूता!
लेकिन चमचागिरी
की बदौलत
उन्हें नेता जी
से वरदान में मिला
चांदी का जूता!!

कथनी-करनी
नेता जी स्वदेशी
चीजें अपनाने को
कहते हैं!
और खुद
साल में छै महीने
विदेशी दौरे
पर रहते हैं!!
मैंने कहा-
यह तो अंधेर है!
यानी,
आधा तीतर
आधा बटेर है!!

पहाड़ा
आजकल के
नेताओं ने
क्या पढ़ा
है राजनीति
का पहाड़ा..!
क्योंकि,
उन्होंने संसद
को संसद
नहीं रहने दिया
बना दिया
है अखाड़ा..!!

अंधा बांटे रेवड़ी
सगे संबंधी,
भाई भतीजे
और मित्र-यार
सभी अच्छे
पदों पर
आसीन हो जायें,
ऐसा हैं मंत्री जी
का ध्येय…!
यानी,
अंधा बांटे रेवड़ी
अपनों-अपनों
को देय…!
अविनाश ब्यौहार
‘उमरिया पान.’
86-रॉयल एस्टेट कॉलोनी
माढ़ोताल, कटंगी रोड
जबलपुर-482002
मो.-9826795372