अंक-4-फेसबुक वाल से-संजीव लवनिया ‘सजीव’

कविता

कुछ ऐसे हादसे भी होते हैं
कुछ ऐसे हादसे भी होते हैं
ऐ मेरे दोस्त जिन्दगी में
कि इंसान बच तो जाता है
मगर जिन्दा नहीं रहता….
हर पल मचलता रहता है
जहन में कई दर्द
सहता रहता है ताजिन्दगी
मगर कुछ कह नहीं सकता..
हंसने वाले तो मिल जायेंगे
लाखों उस पर
जो बांट ले उसके गम
वा मसीहा नहीं मिलता…..
वाह रे दाता तूने नाम इसका
इंसान रख दिया
चेहरे भी इनके हूबहू इंसान लग रहे
दिल से मुझे कोई इंसां नहीं मिलता….
पर दिल से मुझे कोई इंसा नहीं मिलता…


श्री संजीव लवनिया ‘सजीव’ की वाल से