हाइकू
पावन प्यार
करो तो पाओ सजा
ये कैसी बात!
प्यार है पूजा
मन में जपो नाम
पंच ना जाने।
मुखर प्रेम
मजबूरी में मौन
पूरा जीवन
छोटी सी बात
प्रेम चाहते सब
करे ना कोई!
उतरे तारे
सज गये मांग में
आये हैं पिया।
गली में प्रेम
गली में खेलें बच्चे
गली में प्राण।
बिकता प्रेम
खरीद लेती सर
किसी भी भाव।
प्रेम में पगे
अंजुरी भर शब्द
हरते ग़म।
प्रेम का भाव
चाहता गम्भीरता
यदि सच्चा हो।
दिल में जन्मा
अधिकार भाव
तो प्रेम दूर।
वीणा के तार
मन में भरें सुर
झनके दिल।
प्रेम की धारा
बह रही बाहर
घर है प्यासा।
प्रेम में पूजा।
प्रेम से करो पूजा।
मिलेगा प्रेम।
मोरनी डोले
ठुमुक नाचे मोर
प्रेम में डूब।
चांदनी फैली
रातरानी महकी
तुम आई क्या?
पनपा प्रेम
उड़ती अफवाह
चौकन्ने खाप!
फूलों का गुच्छा
प्रेम का उपहार
सूखता दिल।
मुखर प्रेम
मांगता समर्पण
दूसरों से ही।
कोरा कागज
लिखकर चाहे जो
भर दो दिल।
मन महके
रातरानी से ज्यादा
कैसे हुआ ये?

डॉ.आशा पाण्डेय
5-योगीराज शिल्प
विशेष पुलिस महानिरिक्षक बंगला के सामने, कैम्प
अमरावती, महाराष्ट्र-444602
सम्पर्क सूत्र : 09422917252