अनोखा सफर-शिव शंकर कुटारे

अनोखा सफर

दण्डकारण्य भूमि में मेरा जन्म हुआ। मेरे मुखिया जगदु ने मेरा पालन पोषण किया। अंचल की जीवन दायिनी नदी इंद्रावती ने मेरी प्यास बुझायी। वनाच्छादित दुर्गम क्षेत्र होने के कारण मुझ तक पहुंचना संभव नहीं था। मेरे आस पास जंगली हिंसक पशुओं का वास था। उस जमाने में यहां मेरे मुखिया जगदु का निवास हुआ करता था। संपूर्ण क्षेत्र घनघोर वनों से आच्छादित था। हिंसक पशुओं का डर बना हुआ था।
लगभग 240 वर्ष पुरानी बात है। मेरे मुखिया जगदु के आंमत्रण पर एक दिन बस्तर के राजा दलपतदेव इस क्षेत्र में शिकार खेलने पहुंचे। वर्तमान में राजमहल स्थित है उसी जगह राजा खडे़े थे। तब एक घटना घटित हुई। राजा के शिकारी कुत्ते खरगोश का शिकार करने में असमर्थ नजर आये। इस घटना के बाद राजा दलपतदेव ने बस्तर से जगदुगुड़ा राजधानी स्थानांतरित किया। सुरक्षा की दृष्टि से यह स्थल राजधानी के लिये उपयुक्त समझा गया। मेरे मुखिया जगदु पर राजा कृतज्ञ हुए और जगदु की इष्टदेवी पूज्यनीय हुई।
मेरे हृदय में पहले राजा का साधारण निवास हुआ करता था बाद में मैंने राजमहल को भी अपने हृदय में बसा लिया। मैंने कभी सोचा नहीं था कि कभी छोटे से कस्बे से राजधानी बन जाऊंगा । जैसे-जैसे समय बदलता गया मैं शहर के रूप में नजर आने लगा और लोग मुझे जगदुगुड़ा के स्थान पर जगदलपुर सम्बोधित करने लगे।
उम्र बढ़ने के साथ मेरा बड़प्पन झलकने लगा। बाद में मुझे चौराहों के नगर के रूप में ख्याति मिली। मुझे देश विदेश के लोग सबसे बड़े रियासत के रूप में जानने लगे। बस्तर रियासत के राजा दलपतदेव, दरियावदेव, महिपालदेव, भोपालदेव, भैरमदेव, रूद्रप्रतापदेव, महारानी प्रफुल्ल कुमारी देवी एवं रियासत के अंतिम शासक महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव को शासन करते देखने का मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ।
शासन प्रशासन के उतार चढ़ाव को मैंने देखा। अंग्रेजों के अत्याचारों एवं सन् 1910 ई0 में भूमकाल नामक आदिवासी संघर्ष को भी मैंने देखा। राजा दलपतदेव को जगदलपुर में पहली बार दशहरा पर्व मनाते हुए देखा। जगदलपुर शहर के संस्थापक दलपतदेव के शासन काल में दलपत सागर एवं गंगा मुण्डा तालाब का निर्माण कराया गया था। आजादी के बाद बस्तर रियासत का भारत संघ में विलय हो गया। इसके बाद राजतंत्र से लोकतंत्र में आए परिवर्तन को भी मैंने देखा। धीरे-धीरे मेरा दायरा बढ़ता गया। अब मुझे संभाग मुख्यालय का दर्जा प्राप्त हो चुका है और मैं लगभग 242 वर्ष का हो चुका हूं। इस अवसर पर मेरे हृदय में बसे सभी लोगों को मेरी शुभकामनाएं।

आपका – जगदलपुर

 


शिवशंकर कुटारे
चित्रकोट रोड जगदलपुर (छ0ग0)
मो. 9406294695