भितरे बांदा गोटोक अचरीत दखलुं रे दादा जीव जनावर हरिक होला मनुख होला भितरे बांदा।। धन…
Category: गुडदुम
हल्बी-हिंदी पत्रिका
हलबी कविता-केशर चंद्र पुजारी
बस्तरिया साग भाजी ऐ ना ऐ बाबू बुदरू। कसने होओ सुदरूं।। मंद लांदा के छांडून। भात…
हलबी कविता-गणेश मानिकपुरी
बेटी बेटी जेबे जनम धरली, पारा गुड़ा उदिम होली… थुमुक-थामक हिंडुक सिकली, हिंडा बुला के हुनचो…
व्यंग्य -वीरेंद्र देवांगन
शराबबंदी पर शराबियों का चिंतन वे रोजाना पीते थे। बगैर पिए उनका हाथ-पॉंव कांपता था। भोजन…
हल्बी कविता-अशोक नेताम
हल्बी कविता पीला बेरा चो समया बुलतूँ संगवारी मन संग खमना ने. चिपटी ने नोन मिरी…
हलबी कविता -श्रीमती देशवती कौशिक
रूख बलसे हे माने तुमी मके नी गोंधा, रूख बलसे तुमी गोंधासित मचो, जीव करलसे तुमचोय…
हलबी कविता-सूरज नारायण कश्यप
चितरकोट मंडई जाउन रले बुलतो काजे चितरकोट मंडई हाट ने दखली मुय बायले मन चो लड़ई।…
हलबी वंदना गीत – महेश पांडे
वंदना गीत मांय दन्तेशरी चो वंदना मांय दन्तेशरी तुमके अरज करूंसे। आया रे….आशीद हमके देस।। तुमी…
हलबी कहानी – सुश्री उर्मिला आचार्य
एनकू दादा ये गांव चो लोग हुन्ह गांव गेलो। हुन्ह गांव चो लोग ये गांव इलो।…
गुड़दुम-नानी कहनी-विश्वनाथ देवांगन
नानी कहनी खजेना….. मंगली स्कुल चो मास्टरीन मनके दखुन खुबे हरिक हउ आय, स्कूल छुटी दिन…