नानी कहनी
खजेना…..
मंगली स्कुल चो मास्टरीन मनके दखुन खुबे हरिक हउ आय, स्कूल छुटी दिन भीतरे कोनी नी रलो बेरा लुगा पींदून मास्टरीन बनून दखूआय, असन लागुआय कि मंगली चो मने खूबे पड़तोर आरू नंगत नौकरी करतोर चो बिचार बांदली से।
आज मंगली स्कुल ले इली सिलट झोरा के खुटी ने ओराली आरू बाट डेवना ने उबुन मंडई ले एतोर लोक मन दखेसे। कोनी बोबो, लाई, रसगुला, मिकचर आरू खेलतो जिमिक फुगा, छचमा, पलास्टिक चो नानी-नानी मोटोर मन के धरून जासत, मंगली के तो स्कूल ने गुरूजी बलते रहे तुचो लगे कागत पतर नीहाय कायने पड़से, मंगली बिचार करेसे मय बुबा के खाजा खजेना काजे पैसा नी मांगे, मय पड़तो काजे कागत पतर घेनतो काजे बलेंदे, मय काय खाजा खजेना खांयदे मोचो घरे चाउर नीहाय बुबा भूति ले कमउन कनकी चउर आनले पेट भरत ले भात खाउंदे, मंगली चो मन दखा सियान के बाट नी दये कितरो सुंदर बिचार, बिचारी दखु रहे भुगतली से पीला दिन ले गरीब गुडां पसेया नी फींगा, करिया हांडी चो पंडरा ढींडा। अमली चटनी चरोटा भाजी चो साग, जीवना जीवतोर काजे काय चो लाज।
बुआ आया इला भूति ले मने मने लोक मन के दखुन मंगली के बल दखत आरू मन के मारून कंदरत केबय बले आमचो जीवना माटी डेंगुर आय, छेरी चो नेंगड़ी चार चे अंगूर आय। मंगली हुशियार पीला आय जानली बुआ आया के बलली नी कंदरा ना मके मंडई बुलतोर हरिक नीहाय मके काईं खाजा खजेना नी घेनून दियास, मान्तर मके तुमी पड़तोर काजे कागत पतर घेनून दिया आया, मय बले नंगत पड़ून भाती मास्टरीन बनुआंय, फेर रोजे खुबे खाजा खजेना खांवां।
आया बुबा चो आंईख ले रद रद आंसू झरेसे, मने मने बलसत आमी बेटी पाउन खुबे धन पाउंलूं, येकय बलूआत भाईग मानी लोक के चे बेटी भाग ने मिरूआय, आज जानलूं महाप्रभु तुमी बेटी साकछात लक्ष्मी आहास, हरिक चो आंसू झरली, मंगली आया बूबा के ऐउन पोटारी होली।
आया किरिया
नाव सोनामती बलले सोनामती चे आय, सोन महा(असन) जेचो मती (बिचार) आसे, रोजे दिने चो असन भात खादली आरू पेज तुमा ने धरून सोनामती हरिक मने सवकार चो बेड़ा ने भूति जायसे, बेड़ा ने अमरे बले नाजुन, आरू सवकार ताना मारते चिचयाय से – दखानु कसन लहर लहर अयसे गांव चो सुंदरी छकमको सवकार चो बेटी, इतरो झटके कसन इलीस सोनामती, खिंडीक बेर ले बले तो एतीस। सोनामती चो चेहरा सर ने उतरी, बामन चो मूसा खादलो बराबर चींव नी करे। मने मने खूबे कंदरली से- हे महाप्रभु बेर येबे उदेसे आरू मय बेड़ा बूता ने अमरलेंसे अउर एदांय फेर कितरो संजकारी एउआंय ये पटिंतर चो गोठ ने तो सवसांझे उफड़ा मरना अयदे ये काय हाल चो जीवना होली बूता करते करते बेरा ने इलो ने बले बारा ठान कहनी। मांतर काय करे सोनामती भूति ले मिरलो पैसा ले घरे बुबा काजे ओखी दवई घेनून नेतोर आसे, संगे संगे पड़तो भाई बहिन मन काजे चाउर-कनकी संगे संगे कागत पतर बले हाट दिन आनून देतोर आय। काय करे ओगाय होली आरू बूता ने भीड़ून गेली। मने बिचार बांदते बांदते कि- ये मसेया सवकार लगे बूता करून करून मय मोचो भाई बहिन मनके आया किरिया खुबे पड़ायेंदे, ये जीवना ने मोचो भाई बहिन केबय नी फंसोत, मय असन बेरा केबय बले एउक नी दयें।
संगे संगे जमाय भूति ने रलो लोग मन के बले सोनामती बलेसे आमी जमाय आपलो घरो जमाय भाई बहिन पीला के पड़ई ने हुसियार बनउं तेबे दिनेक बले डोकरा डोकरी बेरा अस्तिर ने जीवां। नाहले सवकार चो ठेचरना ने बेरा ले लेते मरून जावां, काकय कोनी नी सांगत मान्तर जमाय भूति ने कमातोर लोग मने मने ’आया किरिया सते गोठ आय’, आमी तो ये गोठ के मोडरी बांदून सगउ रहूंदे।
भूति ने कमातोर लोक चो बूता होयसे, सवकार चो टोंड डंडिक नी थहरे, काइं ना काइं काकय ना काकय बलते रहेसे, भूति लोक भूति करसत दिन कटेसे…
आया किरिया
एंदाय बिचार दसना उठाय से
कुकड़ा बासली उजर होउक जायसे
मने-मने शीत परायसे
मने-मने बाड़ेसे घाम।
जेबे जेबे अत्याचार उपरापेला
आया किरिया तेबे तेबे होयसे बिहान ।
काचा मारना
बुदरू आज बिरबिटाल रिस होलोसे, जेके दखले तेके गारी दयसे। दखलो लोक के बलेसे- ’बस्तरिया तुमी काईं नी करा, पानी बड़ून मरा। चूड़ी पींदून बुला नाहले, कांड धनउ के धरा। नीहाय काईं चो थर, कसन बाड़ती होयसे तुचो बस्तर, लाल बेंदरा बांडा कोलेया मन, फेर भुकर सत, लहूलुहान सासाओड़ा बोहेसे। ये पंडरा मूसा मन चो काय गेली फोकहा फटफटी चेगुन फोबई होला। ढोल भर धान ढोंगहा किरसान। दिन नी पाहली रकत बोहली, कितरो दिन ले ये पटिंतर चो करलानी चो लागा खादलूं से। काचो बदी आय कोन ये बेंदरा मन के उचकाय से चेघाय से कोन राज देश चो ये राजरिहड़ी राहु शनि मन के आनला रबि धुकी बले नीखाय बनबरहा मनके। हाथ चो चूड़ी उजड़ली राखा करू जुवान मन चो जीव गेली केबे ये रकत जीवना मेटून जायदे काचो किरता ने होयसे। पंडरा मुसा मन गद ने गदेया बनासत, आरू पोडरा बेरा चो धान के किरडुन-किरडुन खासत। बस्तर राज चो चीन्हा हाजेसे। बस्तर माटी गागेसे। कितरो दिन अउर ये लागा के छूटतो आय। काचा मरना कितरो दिन आय। बस्तर राज धड़ी कोना नी बाचली से उबागरी मन चो डरानी ने। नदीं डोड़ी चो पानी सुकली। बंदूक चो गरजन ने बन चो जीव जंतुर लुकून गेला, कितरोय के चोरून नीला। ये डरानी चो आड़ ने जीव जन्तुर के बाहरेया मनुख चोरून नेसत। बस्तर चो चिन्हा इता चो रूख राई, लोहा, पानी, गाँव भूंय जमाय के लुकून लूकुन भीतरे भीतरे गरब ने चोरून खासत। आमी बस्तरिया केला कोंदा भकवा लोक, मुरे नी जानूं गरब गोठ। काईं के नीं जानू ना चिन्ता करूं। चेतूं आरू आमचो बस्तर माटी जागारानी चो राखा काजे मने जमाय किरया खांव। कितरो दिन ले आमी नंजर पूरे पूरे दखते रवां ये करलानी रोजे रोजे काचा मरना।’
बुदरू सते गोठ के तो बलेसे, काईं नसतो के नी बले, कितरो दिन ले दखेसे, सुनेसे बाहरेया लोक चो ठेचरना। बस्तरिया लोक भकवा लोक। आमी मति ने आरू सुतुर होउन, किरिया खांउं, येदांय करूं ये कोन दिन चो लागा चो भरना। पुइतने मेटो येदांय ये काचा मरना।
सगनाहा
जीवना चो गीद नी करा कोनी जीद, केबय मिरूआय दार भात केबय चूचाय पानी, उपरबीता देव लोक चो महेमा के नीहोय जानी।
भीता भर चो पेट मान्तर जायसे ठिया ठेट, समया समया चो भाव ने बिलई बाग होयसे गांव ने। बिचरंगा बुदरू भूक हउ रहे, पेट काजे काय करे, सवकार चो बेटा चो लाई चना के खातो के दखलो, लालच ने इजीक लगे सरक खिंडिक सरक सरकुन लगे अमरलो, बाट रेटे बसुन गिरलो लाई मन के बेचून बेचून खायसे, फेर दखेसे हारेक एबाट उन बाट फेर बेचेसे फेर खायसे, मसेया सवकार चो पीला नंगत मया करू आय, पीला लोक काय जाने पीला लोक भगवान माने,सवकार चो नी दखतो बेरा फेर फेकून दयसे इजीक लाई चना के। लेका सवकार चो डर काजे नंजर लुकातो खायसे काय करे भीता भर चो पेट के भरतो बले तो आय, फेकलो लाई कितरो पेट भरूआय मान्तर काय करे गरीब गुडां लोक। काम बूता मीरे नहीं आया बूबा खमना ने लकड़ी काजे गेला बीकून भांजून कनकी चउर आनले पेट भरत ले भात खादे नाहले राती भूके सवतो। सवकार चो नंजर पड़ली बुदरू चो लाई के बेचून खातो लगे हुता कहां सवकार बाग असन घोगललो – ’ये के कोन दाना दिलास ना इता बाटे लागा धरूक बसलोसे सगनाहा, ये के खेदा इता ले, ये लगे दखा देतोर नुहाय मके।’
बुदरू दादी चो गोठ के सुरता करते मने अफारते जायसे। सते बलूआय दादी कहका आसे दागा बड़े की हागा बड़े, हागा चे बड़े ना, मान्तर आज दागा बड़े होली, बुदरू डर काजे परालो बिचारा मने मने खूबे कंदरते बिचार करते जाये, गरीब होतोर बले कोनी दिन चो पाप करलो चे आय ना, नाहले फेर लहू गोटकी आय, उनी चाउर चो भात के सवकार भूतियार दूनों खाउंसे, फेर गोरोस तो नी फूटे काचोय देंहें ले, कसन ने तेबे मय सगनाहा होंलें,
धन से तकदीर, फूटहा करम, राज चो धन के ठगुक खाउ सवकार नंगत माने, राती दिने बूता करूं मय होलें सगनाहा।

विश्वनाथ देवांगन