हल्बी कविता-अशोक नेताम

हल्बी कविता

पीला बेरा चो समया
बुलतूँ संगवारी मन संग खमना ने.
चिपटी ने नोन मिरी गोंदरी आउर तुमा ने,
काय मंजा सित्तर,मँडया-गहुँ चो पेज धरुन.
पान, दतुन, बोड़ा, कोसा,धूप खोजतूँ.
चार,चड़इ जाम खातूँ,
रुक ले टोड़ुन टोड़ुन.
पीला बेरा चो समया,
फेरे एती बने बोहड़ुन.
खमन चो बाँस्ता, बोहार,पेंग भाजी,
मेटुआत आमचो भूक.
आमचो जीवना आत ए टेमरू,सरगी,सिवना,साहजा,
आउर कएक किसम चो रुक.
लमहा पाटे परातूँ, रामी-पंडकी धरतूँ.
आनतूँ आमि आपलो घरे,
पीता कांदा खोड़ुन.
पीला बेरा चो समया,
फेरे एती बने बोहड़ुन.
माय बाप जे के नी करा बलता हुनके करतूँ.
आमि काकय फेर काय काज डरतूँ.
नंदी ढोड़ी में दिन भर ढोपकतूँ.
मसरी, केकड़ा,घोंघा धरतूँ.
बरसा पानी ने छम छम नाचतूँ,
साता, सत्तोड़ी ओड़ुन.
पीला बेरा चो समया,
फेरे एती बने बोहड़ुन.
मिरती फेर आया चो कोरा.
जुहातूँ बुलुन-बुलुन सरगी,महु,टोरा.
नानी-नानी पाँय ने हींडते बाटे-बाट.
जातूँ बिहाव,सगा, मंडई,हाट.
नांगर,आँगा,गाड़ी बनातूँ,
लकड़ी जोड़ुन जोेड़ुन.
पीला बेरा चो समया,
फेरे एती बने बोहड़ुन.

 

जीवना दुय दिन चो हाट

अवधरम के छाँड तुय, धर धरम चो बाट.
जीवना दुय दिन चो हाट, जीवना दुय दिन चो हाट.
गोदी खनला-बनी गेला, दुखा धराला हाथ-पाँय के.
सेवा करा हुनमन चो, नी भुलका बाप-माय के.
नी सरे काँई तुमचो, खरचा नी होय नोट.
जमाय आँव भाइ-भाइ, हाँसुन गोटयाव गोट.
मया चो सूत ने बाँध सबके, भरम चो डोरी के काट.
जीवना दुय दिन चो हाट, जीवना दुय दिन चो हाट.
आपुन के लाट साहब, नानी नि समज तुय आउर के.
पियेसे कोनी पेज-पसया, तुय बले खासित हुनि चाउर के.
बड़े नी होय कोनी मनुक, रुपया-पयसा गाड़ी ने.
सन्तोस रलोने सुक मिरेसे, डारा पाना चो लाड़ी ने.
मिलुन रा सबाय संग, नानी बड़े चो खोदरा के पाट.
जीवना दुय दिन चो हाट, जीवना दुय दिन चो हाट.
सवकार हवो कितरोय कोनी, कोनी रहो बे कमया.
पराते जायसे थेबे नइ केबय, काचोय काजे समया.
माटी आय देंह आमचो, कोनी दिन बले माटी होयदे.
नी रहेदे ए काँई काम चो, भुँय खाले पाटी होयदे.
कितरोय लाम रहो बे राति, सरुन चे जायसे नाट.
जीवना दुय दिन चो हाट, जीवना दुय दिन चो हाट.


अशोक नेताम बस्तरिया
कोंडागांव छ.ग.
मो.-9407914158