हल्बी कविता-दिनेश विश्वकर्मा

धरतनी तुचो आय

अकास तुचो आय ।
धरतनी तुचो आय ।
काय काजे तुय डरसित
खुबे मसागत कर ।

जीवना काय आय
खिंडिक घाम
खिंडिक छाँय आय ।
इथा सपाय दिन
एकेच नोहाय
हुनके काय मिरली
मके काय मिरली
ए बिचार के छाड़ून

सत चो बाट के धर
अछा समया अयदे
धीरज धर ।
सपाय लोग मन के
उदिया बेर ने
जुहार करेंसे।

इन्दराबती के दखा
केबय खुबे बोहेसे
केबय कम बोहेसे
फेर बले लोक मन चो
जीवन दायनी बनेसे

केशकाल घाटी के दखा
कसन टेड़गा मेड़गा
मान्तर लोग मन चो
घरे अमरायसे।

आले चितरकोट के दखा
बस्तर चो सुंदर रूप दखायसे
देश बिदेश ने बस्तर चो मान के
बढ़ायसे

बस्तर चो रान बन के दखा
लोग मन के जीवना चो
पाक फर लेहरा पानी दयेसे

तुय तो भगवान चो अंश आस
तुय कम नो हास
उठ किरिया खा
जिततो बिता बन ।

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दिनेश कुमार विश्वकर्मा
कोण्डागांव