मोचो गोठ
गुड़दुम के तुमचो हाते दखुन,
मके खूबे हरिक लागली।
तुमी बले खिंडिंक हरिक होलास होयदे।
जय जोहार
मांटी मांय के शरन करेंसे। जमाय पढू़ आरू लिखू सियान सजन मन के डंडा शरन पांय पडेंसे। ये बेरा ने कोनी कोनी चे लिखसत आरू पढ़सत। नाहले जमाय चो हाते मोबाईल इली एदांय। ये बेरा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चो जमाना होली से आजी काली टिक-टिक दबाला की सुना,लिखा,पढ़ा,चीना,बाना जमाय बानी आपलो मन चो लिख लो बराबर तियार करलो मीरेसे। तुमी जमाय लिखासीत पढ़ासीत ये खूबे बड़े भारी गोठ आय आरू मान चो आरू धियान चो गोठ आय। आजी काली आमी आपलो मांय भासा,आपलो घर गोठ चीना-बाना,रीति-नीति तिहार-बहार,चीना-बाना संगे-संगे लोलो-बालो,आया-बूबा,सगा-सील-समाज मन संगे बले बसा-उठा नी करूं ना ये के उतरो मान देतो के भूलकुं से जसन की देतोर समया चो मांग आसे। फेर आपलो माटी मांय आरू सगा समाज संगे देश काल चो ससरंग के लिखतो बेरा चो मांग आसे। तेबे येतो बेरा ने आमचो नवा पीड़ी दखेदे आरू पडु़न भाती गुनेदे। मान्तर लिख दे कोन ये सबले बड़े ये बे चो सवाल आय। ये चो उतर बले आमचोय लगे आसे आमी लिखवां आमचो नवा पीढ़ी के लिखावां। बाट दखाक पड़ेदे,उन बाट ने हिंडाक पड़ेदे। बाट नी रले बाट दखाया नी रले कोन उन बाट ने जादे। आमचो सियान साहित्यकार आरू मानेया सजन मन हल्बी के मान आरू मया ने साहित चो रचना करते इला सत आरू पूरे बले ये ते रदे। अई लिखा पढ़ी संगे बस्तर माटी चो मान आरू कीर्ति के पूरे नेतो आरू जमाय के हल्बी जोन आमचो बस्तर रियासत चो राजभाषा रली जे ने लिखा पढ़ी आरू राज-काज चो आदेश निरदेश पारित होते रली। उन लाग के नी छाड़ून उन चो मान के बाड़ती करतो काजे लिखतो समया चो खूबे बड़े भारी दागा आय। अई आर धरातो काजे ये गुड़दुम पत्रिका के मुर करलो आसे मय अइ मानेंसे।
अदाय ये सवाल मन ने अयसे कि लिखुआत कोन। ये बेरा हल्बी ने लिखेया चो अंकाल पड़ली से। दूय चार जने सरकारी काम योजना मन के ढेकलून ठेगलून काम चलातोर काजे खोजून मीरान लिखा पढ़ी करून कोनी-कोनी मिसड़ा लिखा बूता ने आसत।जिंवटी,मंगरी,बामी,तुरू,चीफा जमाय के झोर साग बनान खातोर होयसे। फेर काय करूंआं आमी? बस्तरेया तो हल्बी के भुलकलोसे। आरू हल्बी ने गोठेयाले-गोठ बात कर ले लाज लागेसे। आमचो देश चो कोनी धड़ी कोना ले इलो मनुख आपलो दूसर सगा समाज नाहले जाना चीना लोग मनुख के दखते आपलो मांय भासा ने गोठेयाऊआत। मान्तर बस्तरेया के लाज लागेसे हल्बी ने गोठेयाले मान गिरेसे। ये आमचो असिक्छा चो कारन आय। मांय भासा ने गोठेयाले गरब होयसे। आपलो माटी मांय चो मान बाड़ेसे। दखतो बीता आमचो गोठ के सुनुन बलेदे ये बस्तरेया भाई आय ना। आरू आमके जानेदे कि बस्तरेया आय बलते। आमी दूय जन बस्तरेया केबे भेट होऊन हिन्दी नाहले अंगरेजी ने गोठेयाले, अच्छा दखा नी दये। उन मन आमचो छामे नी बलोत मान्तर आमचो मान घटेसे। बस्तरेया होऊन हल्बी नी जानले आपलो मांय भासा के नी मान ले। कितरो लाज आरू सरम चो गोठ आय। ये गोठ के छाती ने हात मडांन बिचार करतो चो बेरा इली से। आमचो ये बे चो लिखतो बेरा ले पूरे खूबे लिखला पड़ला सत उन साहित चो धारा के लिखा पड़ी करते बड़ातो आमचो पुन काम बले आय। आमचो रचना ने आमी सिरप नंदी,ढोड़गी, मुसा,चूटया आरू मंद मांस के चे नी लिखते रहूं। काय काजे की आमी कोनी जाहला नाहले नटवार नुहांव। ये चो ले पूरे जांव साहित चो अनेक बिधा मन आसत उन जमाय बिधा मन ने लिखूं। जेने आमचो हल्बी साहित समरिध होयदे। आमचो साहित चो ढुसी बाड़ेदे। कबिता,कहनी,नानी कहनी, यात्रा बृतांत,नाटक, उपन्यास आदि असने कितरोय आउर बले बिधा आसत जोन ने आमी लिखूक सकूं। आमचो सियान रचनाकार मन के पड़ते जाऊं आरू सीखते जाऊं आरू आमी बले बाट ने हिंडूं लिखते जाऊं।
मोचो गोठ बात ने अई मुर गोठ रली। जमाय पढू़ लिखू गुनू सियान सजन मन। ये आर धरातो चो मुर पाड़ आय। तुमके कसन लागली मोचो हुच-हुचानी पाड़। मय बले सीखनेया माने आंय। चेतावा,सीखावा, बाट दखावा। मके चिट्ठी लिखा से, वाट्सएप करासे,नाहले परेवां (मोबाइल) आसे चे।
माटी मांय चो किरपा रहो आमी तुमी लिखते रहूं आपलो भासा ने गोठ बात के बाड़ती करूं।
जय जोहार।
तुमचोय-

विश्वनाथ देवांगन (अंक संपादक)
ग्राम-भीरागांव
पोस्ट-बुनागांव
त.$जिला-कोण्डागांव
मो.-7999566755