रंग रंगीला बस्तर-भाजीराम मौर्य

 

आदिवासी मुरिया समाज की माहला रस्म

मुरिया समाज में युवक युवती शादी की उम्र होने पर माता-पिता युवा पुत्र के लिये युवा कन्या की तालाश करते हैं जो स्वयं की जाति एवं विपक्ष गोत्र की हो, उससे ही रिश्ता करते हैं। इसमें युवक-युवती के आपस में पसंद-नापसंद पर निर्भर करता है। आपस में पसंद हो जाने पर माहला रस्म शुरू की जाती है।
राशि गुण शुभाना-युवक के माता पिता, युवती के माता पिता से युवती की कुण्डली लेते हैं। शुभाने हेतु पंजिहार के पास जाते हैं। शुभ संकेत पर आगे की रस्म की जाती है। शुभ संकेत के अनुसार युवक के माता पिता अपने पड़ोस के व्यक्ति को माहलाकारी के रूप में लेकर लाई चिवड़ा, मिष्ठान, थिपानी, शराब आदि की व्यवस्था कर शुभ संकेत के निर्देशानुसार रास्ते में होने वाले शगुन अपशगुन को ध्यान में रखते हुये युवती के माता पिता के घर पहुंचते हैं। और जाते समय रास्ते में दिखने वाले शगुन अपशगुन एवं कुण्डली मिलने की बातों के अलावा अन्य चर्चाएं करते हुये रिश्ता जोड़ते हैं। गांव के पुजारी को बुलाकर रिश्ता जोड़ने हेतु पूजा अर्चना की जाती है। इसमें स्वयं के परिवार के सदस्य ही भाग लेते हैं। तत्पश्चात लाई चिवड़ा, मिष्ठान वितरण किया जाता है।
सगा जानती माहला-युवक के माता पिता युवती के माता पिता के यहां दो तीन दिन पहले संदेश देते हैं कि दिन सगा जानती माहला आने वाले हैं। तब युवती के पिता अपने रिश्तेदारों, पारा पड़ोसियों को उस दिन आमंत्रण करता है। युवक के माता पिता, माहलाकारी एवं अन्य दो तीन लोगों सहित माहला के लिये आवश्यक सामग्री जैसे- लाई, चिवड़ा, मिक्चर, बूंदी और थिपानी शराब आदि लेकर युवती के घर पहंुचाते हैं। गांव के पुजारी की उपस्थिति में सभा आयोजित की जाती है। लाई, चिवड़ा, मिष्ठान आदि का वितरण किया जाता है।
जोड़ा माहला-युवक के माता पिता के यहां से पांच खण्डी धान, दो पायली दाल, लाई, चिवड़ा मिष्ठान आदि लेकर गांव के पुजारी सहित अन्य गणमान्य महिला पुरूष युवती के घर पहुंचते हैं। तब युवती के माता पिता द्वारा समाज की सभा आयोजित की जाती है। सभा के समक्ष चेगती, चड़ती पहर यानी प्रथम प्रहर में ही जोड़ा नापने का कार्य गांव के पुजारी द्वारा पूजा अर्चना कर नापा जाता है। तत्पश्चात शादी के दिन जो नीति नियम लेन देन लागू होता है उस पर चर्चायें की जाती है। जिसमें भोजन भात, बाराओरी चावल, टेंग, कांवड, बाट छेकनी, पूजा में लगने वाली सामग्री की राशि, माय लुगा, सास पाटा, चूड़ी फिदी राशि आदि तय की जाती है।
विवाह माहला-सुविधानुसार पंजिहार से लगन समय तिथि शुभाकर माता पिता एवं माहलाकरी युवती के घर सूचना देने जाते हैं। तब फिर दोनों पक्ष अपने अपने सगा जनों एवं सम्बंधियों, दोस्तों यारों को शादी का निमंत्रण करते हैं।

भाजीराम मौर्य
व्याख्याता, डाइट बस्तर

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