काव्य – दिनेश विश्वकर्मा

औसत जिंदगीनामा कितनी परतें हैं जिंदगी की समझूं अगर… तकिये पर ख्वाबों की कसीदाकारी है सड़कों…

काव्य-दिनेश विश्वकर्मा

बेटी का ब्याह गरीब पिता के लिए होता है जीवन भर का स्वप्न कई बार देखा…