हलबी कविता-हितेन्द्र कोण्डागंया

– पडा-लिका –

पडा लिका
अरू
लिका पडा
लगे जानू
ईसकूल आसे ।

अदायं तो
मुबाईल ने
बले
पडा-लिका
सीकसत ।

सरकार चो
नवा उवाट
पडई तुअर
दुआर
खूब सुनदर ।

ए गोट के
सपाय समजा
पिला-जिला के
नगत सीकावा
देस के सुदरावा ।

हितेन्द्र कोण्डागंया