बलले बडे अकल
राने गोटोक बाघ… रये,
सब जीव के डराऊन खाए।
गोटक दिने प्यास काजे,
लकर लकर पानी खोजे।
मंजी राने रये मुंडा,
मुंडा ने रये…. कचिम,
मुंडा हिरी ने सोऊन रये।
बाघ मुंडा के दखुन हाय करलो,
पिवलो पानी रांय करलो।
मारलो छलांग धरलो कचिम,
धरलो टोंढे निलो राने
कचिम चो चाल के नाजुन जाने
रुख छायें धरुन निलो।
खायेदें बलुन हरिक होलो,
चाबुन धखलो पखना असन,
बिचार करलो खायेदें कसन।
कचिम बललो थेब ता राजा,
पानी पुलावउन पाछे खा।
धरुन निलो मुंडा ने,
पुलायउन खायेदें बलुन।
कचिम बाघचो गोठ के सुने मुंडी लुकाउन।
बाघ कचिम… के धरुन निलो,
मुंडा भितरे बुडाउन दिलो।
कचिम चो जीव हाय करली,
खायेदें बलुन टामढूंन दखलो,
कचिम छुटेराम करलो।
बाघ कचिम चो ढेटा के धरलो।।
तेबे तो बलुआत बल ले बडे अकल..।
पुरुषोत्तम पोयाम
हीरापुर (माकडी)