तमन्ना
ख़्वाबों के एक जहाँ में
यादों के आसमां में
अपने अरमानांे पर कर काबू
तुम्हारी मुस्कराहट और अपनी रगों से
लहू का रंग लेकर
अपनी हँसी दुनियाँ में
इन्द्रधनुष बनाने कि तमन्ना थी
तुम्हारा न में गर्दन हिलाना और फिर दूर चले जाना
बस काफी था
दिल के दो टुकड़े करने को।
चंपा मुस्कुराती है
हर एक सुबह
आंगन में झाडू मार, नहा-धो
सबसे पहले तुलसी को जल चढ़ाती है
आंगन की तुलसी सा ही
उसका जीवन भी है
बच्चों को स्कूल भेज खुद भी काम पर जाती है
काम से लौट घर के काम पर लग जाती है
थकान उसके पास नहीं मंडराती
उसके साहस के सामने नहीं टिक पाती
शाम को तुलसी चौरा में दीपक जला
चंपा मुस्कुराती है
अहमियत
तुमने समझा
मेरे विचारों को
अहमियत दी,
मेरे ख़्यालों को
और फिर
शुरु हुई एक कहानी
जिसमें छुपी रही
मेरी तेरी सब की
ज़िंदगानी।
तेरा एहसास
एक ठण्डी हवा का झोंका
जब-जब मेरे पास से गुजरता है
तब-तब तेरा एहसास
हर एक बार मुझे होता है।
तू सही न सही
तेरा एहसास ही सही
जिन्दगी जीने का एक मकसद तो देता है।
एहसास
हर एक चुम्बन
वो हर एक एहसास
मुझे आज भी याद है
जो एक माँ का
उसके बेटे पर अधिकार है।
मन में चिंता
चेहरे पर तनाव
बेटे के भविष्य का ख़्याल
मुंह में डंाट
पिता का अलग ही अंदाज हैं।
वसंत
रक्तमय केसर भरा
खिलखिलाकर हंस रहा
हिल रहा, डुल रहा
धूर्तता को पट रहा
जात वेद शिखी सा
द्रव्य के ऋषि सा
प्रकृत के चैतन्य का
भाव वेश धर रहा
भूतेश को प्यारा लगे
मनीषा का प्रतीक ये
अलि स्वागत गीत गा रहा
चंचला को बुला रहा
श्री की मुस्कान ये
उर्मि की पहचान यह।

शिवेन्द्र यादव
जगदलपुर
मो.-9406479491