कविताएं -निहाल सिंह

निहाल सिंह की पांच कविताएं

1. नववर्ष 
फूलों पर नई
कोंपलें निकल
आई है
जिनपर चार- पांच
भंवरे मंडरा रहे है
पहाड़ों पर बर्फ़
की टुकड़िया
बिखरी पड़ी है
कबूतर खाने के
चबूतरे पर
परिंदे धूॅंप सेक
रहें है
लोग नववर्ष की
शूभकामनाएं दे
रहें है
मोबाइल पर मैसेज
करके ओर कुछ
सीधी काॅल ही
कर रहें है
2. रात की पहर 
गांव की गलियां
सुनसान सी पसरी
पड़ी है
बिजली के खंम्भे
पर लटकी हुई
ट्यूब लाईट
जगमाती हुई
ऑंखों से निहार
रही है सुनसान
गलियों को
दो कुत्ते भोक
रहें है एक दूसरे
पर शायद वो
एक हड्डी के
टुकड़े के लिए
लड़ रहे है
एक शराबी उनको
ऑंखे फाड़ कर
देख रहा है
दो नवयुवक
बाईक पर अचानक
से गुजर रहे है
शोर करते हुए
3. कोहरा
धरा पर कोहरे
के टुकड़े बिखरे
है जहां तक
नजर जाती है
सफेद धुंआ सी
उड़ती दिखाई
पड़ती है
बिजली के तार
पर दो कबूतर
बैठे बतला रहे है
उनके पांवों के
वज़न से
तार हिचकोलो
खा रही है
खेत के कोने
में चार- पांच
नीलगायें ठंड से
थर- थराती हुई
एक दूसरी से
चिपकी हुई है
उनकी मुरझाईं
ऑंखे धूॅंप निकलने
की चाह में है
4. संस्कार मिटने लगें हैं 
रात हुई की
खाना खाकर लेट
लिए बगल में
मोबाइल लेकर
न माॅं से बात की
न पिता के पांव
छुए
संस्कार मिटने
लगें है
मोबाइल पर
सुन्दर सी
लड़कियों को
लाईक करने में
ही रात
गुजर जाती है
घर पर बैठकर
बातें करने
की फुर्सत किसे है
पढ़ने को कहें
तो जोरों का
सर दुखने
लगता है
किताबें काटने
को दौड़ती है
5. चमली के फूल
तितलियां होले से
फूलों पर उतर
रही है
उपवन में बसंत
छाने लगा है
आहिस्ता से
चमली के फूलों
के मुखड़े
खिलने लगे है
नई कोपलें निकलने
पर परिंदों
का आगमन
होने लगा है
जोर शोर से
चमगादड़ चिपके हुए
है टहनियों के
खुले चेहरों पर।
निहाल सिंह 
जनपद – झुंझुनूं
राज्य – राजस्थान
व्यवसाय – कृषि
ई-मेल – nihal6376r@gmail.com
सम्प्रति – कई पत्र-पत्रिकाओं एवं वेबसाइट्स जैसे –
अनुनाद, कृत्या, ईरा, सेतु, आंच, शब्द बिरादरी,समता मार्ग,
हिन्दी कुंज, गीता कविता, हिन्दी साहित्य ऑंर्ग, साहित्य शिल्पी, साहित्य कुंज इत्यादि में रचनाएं प्रकाशित हो चुकी है।